उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक शहर ऋषिकेश में चार धाम यात्रा से पहले एलपीजी (रसोई गैस) की भारी कमी ने होटल और ढाबा उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है। हर साल लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से पहले तैयारियों का समय होता है, लेकिन इस बार गैस की किल्लत ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
होटल मालिकों और सड़क किनारे ढाबा संचालकों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं, जिससे उनके लिए रोजमर्रा का संचालन करना मुश्किल हो गया है। इस समस्या के चलते कई व्यवसायी अब मजबूरी में पारंपरिक ईंधनों जैसे लकड़ी, कोयला और चारकोल का उपयोग करने लगे हैं।
व्यापारियों के अनुसार, एलपीजी की कमी न केवल उनके कामकाज को प्रभावित कर रही है, बल्कि लागत भी बढ़ा रही है। लकड़ी और कोयले के इस्तेमाल से भोजन बनाने में अधिक समय लगता है और इससे प्रदूषण भी बढ़ता है। इसके अलावा, पर्यावरण पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जो एक चिंता का विषय है।
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चार धाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में ऋषिकेश से होकर गुजरते हैं। ऐसे में होटल और ढाबों पर भोजन की मांग काफी बढ़ जाती है।
स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द एलपीजी की आपूर्ति सामान्य की जाए, ताकि यात्रा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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