मद्रास हाईकोर्ट ने चेन्नई के पूर्व पुलिस आयुक्त ए. अरुण द्वारा जारी किए गए एक निरोधात्मक हिरासत आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि एक रियल एस्टेट कारोबारी को “गुंडा” घोषित किया जाना न्यायिक विवेक को झकझोरने वाला मामला है।
गर्मी की छुट्टियों के दौरान सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने पूर्व ग्रेटर चेन्नई पुलिस आयुक्त ए. अरुण को 27 मई 2026 को अदालत में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
यह मामला रियल एस्टेट कारोबारी संतोष शर्मा से जुड़ा है, जिनके खिलाफ डीएमडीके के राज्यसभा सदस्य एल. के. सुधीश की पत्नी एस. पूर्णज्योति की शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद ए. अरुण ने संतोष शर्मा के खिलाफ तमिलनाडु के चर्चित गुंडा एक्ट के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की थी।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किसी कारोबारी को “गुंडा” बताकर हिरासत में लेना गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने टिप्पणी की कि यह आदेश न्याय और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सिद्धांतों के खिलाफ प्रतीत होता है।
खंडपीठ ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल बेहद सावधानी और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। अदालत ने इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है कि किन परिस्थितियों में ऐसा कठोर कदम उठाया गया।
मामले को लेकर कानूनी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट की यह सख्त टिप्पणी प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई पर बड़ा संदेश देती है।
अब सभी की नजर 27 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जब पूर्व पुलिस आयुक्त ए. अरुण अदालत के सामने अपना पक्ष रखेंगे।
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