महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी, विश्वसनीय और अभ्यर्थी-केंद्रित बनाने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सामान्य प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के. राधा करेंगी। इसका उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों पर प्रभावी रोक लगाना है।
समिति के गठन का फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 12 अगस्त को हुई बैठक में लिया गया था। समिति भर्ती परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने, उनकी गोपनीयता बनाए रखने, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल तथा नकल रोकने के उपायों का अध्ययन शामिल है।
सात सदस्यीय समिति में पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह, नासिक के संभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम, पूर्व यूपीएससी सदस्य एयर मार्शल अजीत शंकरराव भोसले और आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर श्यामप्रसाद करगुटे समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं।
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सरकार का लक्ष्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को कम कर अभ्यर्थियों को भरोसेमंद और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
महाराष्ट्र में बनेंगे 25 हजार सुरक्षित कक्ष
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में भर्ती परीक्षाओं के आयोजन के लिए कम से कम 25 हजार सुरक्षित कक्ष तैयार करने का भी निर्देश दिया है। इन केंद्रों पर परीक्षा की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
हाल ही में संसद के दोनों सदनों ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पारित किया था। यह कदम प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और अनुचित साधनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र में पहले से इस संबंध में कानून मौजूद है। हालांकि, फडणवीस ने अधिकारियों को केंद्र के अधिक कड़े कानून को राज्य में लागू करने की प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।
बैठक में जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने अन्य देशों में अपनाई जा रही परीक्षा प्रणालियों और महाराष्ट्र की मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन कर संभावित सुधारों पर विचार किया।
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