भारतीय पहलवान मनीषा भंवाला एची-नागोया एशियन गेम्स में अपने पदार्पण के लिए तैयार हैं। 62 किलोग्राम से 57 किलोग्राम वर्ग में आने के बाद मनीषा अपनी ताकत, तकनीक और मानसिक तैयारी पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
मनीषा ने बताया कि पहले वह मुख्य रूप से दाएं स्टांस से कुश्ती लड़ती थीं, लेकिन अब उन्होंने बाएं स्टांस से भी खेलने का अभ्यास शुरू किया है। उनका लक्ष्य दोनों तरफ से सहज होकर मुकाबला करना है। उन्होंने कहा कि नई श्रेणी के अनुरूप खुद को ढालने के लिए तकनीक के साथ मानसिकता में बदलाव भी जरूरी है।
एशियन गेम्स मनीषा के लिए खास हैं, क्योंकि यह उनका पहला एशियन गेम्स होगा। लंबे समय से भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं मनीषा ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल मैट पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।
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उनका कुश्ती सफर 2013 में शुरू हुआ था। उनके पिता ने उन्हें फिटनेस सुधारने के लिए एक कैंप में भेजा था, लेकिन धीरे-धीरे कुश्ती में उनकी रुचि बढ़ती गई। शुरुआती दबाव और आत्म-संदेह के बाद 2021 से उनकी मानसिक मजबूती बढ़ी है। चोट के दौरान भी अभ्यास जारी रखने को वह अपनी ताकत मानती हैं।
मनीषा ने इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (आईआईएस) और भारतीय टीम के प्रशिक्षण शिविरों को भी अपनी तैयारी में महत्वपूर्ण बताया। जापानी कोच कोसेई अकाइशी से मिले तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें 57 किलोग्राम वर्ग में बदलाव के दौरान मदद मिली है।
मनीषा को इस बात की भी खुशी है कि उनके गांव की युवा लड़कियां उन्हें देखकर कुश्ती अपना रही हैं। वह युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना भी पसंद करती हैं।
एशियन गेम्स से पहले उनका संदेश स्पष्ट है—मेहनत से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
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