स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री मारियानो रखोय अपने एक विवादित बयान को लेकर आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं। उन्होंने फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे कई लोगों ने 'ज़ेनोफोबिक' (विदेशी मूल के लोगों के प्रति पूर्वाग्रहपूर्ण) करार दिया है। इस बयान के बाद स्पेन और फ्रांस दोनों देशों में राजनीतिक और खेल जगत से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
मारियानो रखोय की यह टिप्पणी स्पेन की समाचार वेबसाइट एल डेबाते में प्रकाशित उनके एक लेख में सामने आई। उन्होंने कहा कि फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में "कोई फ्रांसीसी खिलाड़ी नहीं है।" उनके इस बयान का इशारा टीम के उन खिलाड़ियों की ओर माना गया, जिनकी पारिवारिक जड़ें अफ्रीका या अन्य देशों से जुड़ी हैं, लेकिन वे फ्रांस के नागरिक हैं और राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में 14 जुलाई को स्पेन और फ्रांस के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला खेला जाना है। मैच से पहले आई इस टिप्पणी ने दोनों देशों के बीच खेल से इतर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी छेड़ दी है।
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आलोचकों का कहना है कि फ्रांस की राष्ट्रीय टीम बहुसांस्कृतिक समाज का प्रतीक है और उसके खिलाड़ी फ्रांस के नागरिक हैं। ऐसे में उनकी राष्ट्रीय पहचान पर सवाल उठाना अनुचित और विभाजनकारी है। कई नेताओं और सामाजिक संगठनों ने रखोय के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए इसकी निंदा की है।
फ्रांस में भी इस टिप्पणी को लेकर नाराजगी देखी गई है। कई लोगों ने कहा कि खेल लोगों को जोड़ने का माध्यम है और खिलाड़ियों की पृष्ठभूमि के आधार पर उनकी देशभक्ति या राष्ट्रीय पहचान पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।
हालांकि, इस विवाद पर मारियानो रखोय की ओर से अभी तक कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, फुटबॉल प्रेमियों का ध्यान अब विश्व कप के बहुप्रतीक्षित सेमीफाइनल मुकाबले पर केंद्रित है, जहां दोनों टीमें फाइनल में जगह बनाने के लिए आमने-सामने होंगी।
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