भारत के तेज गेंदबाज मयंक यादव ने लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दमदार वापसी करते हुए जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया। अपने बेहतरीन गेंदबाजी प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। मैच के बाद मयंक ने लगातार चोटों से जूझने के अपने कठिन सफर और वापसी की कहानी साझा की।
साल 2024 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने के बाद मयंक यादव को कमर में स्ट्रेस फ्रैक्चर, सर्जरी और कई अन्य चोटों के कारण लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा। लगभग दो वर्ष बाद उन्होंने हरारे में खेले गए पहले टी20 मुकाबले से भारतीय टीम में वापसी की।
मैच में मयंक ने पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को बिना खाता खोले आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। इसके बाद उन्होंने पावरप्ले में डियोन मायर्स का विकेट भी हासिल किया। चार ओवर में सिर्फ 18 रन देकर दो विकेट लेने वाले मयंक ने जिम्बाब्वे को 125 रन पर रोकने में अहम भूमिका निभाई। भारत ने 126 रन का लक्ष्य छह ओवर से अधिक शेष रहते आसानी से हासिल कर लिया।
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मैच के बाद मयंक ने कहा कि लंबे अंतराल के बाद भारत के लिए खेलते समय वह थोड़े नर्वस थे। उन्होंने कहा, "देश के लिए दोबारा खेलना हमेशा खास होता है। इतनी लंबी वापसी के बाद दबाव स्वाभाविक था, लेकिन मेरा लक्ष्य अपनी ताकत के अनुसार गेंदबाजी करना था।"
उन्होंने बताया कि चोटों के दौरान केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती भी बेहद जरूरी होती है। मयंक ने कहा, "रीहैब और सर्जरी के बाद मैंने अपने शरीर को पहले से बेहतर समझा। मानसिक रूप से मैं काफी मजबूत हुआ और यही मेरी सबसे बड़ी ताकत बनी।"
भारतीय टीम को उम्मीद है कि मयंक यादव अपनी इसी लय को बरकरार रखते हुए आगामी मुकाबलों में भी तेज गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई करेंगे।
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