महाराष्ट्र के जुन्नर की रहने वाली प्रणिता वामन ने कॉरपोरेट नौकरी छोड़ खेती को अपना करियर बनाया। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से एमबीए करने वाली प्रणिता ने कोविड-19 महामारी से ठीक पहले पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती शुरू की। आज उनका कारोबार करीब 4 करोड़ रुपये का है।
प्रणिता के मुताबिक, एक फूड प्रोसेसिंग कंपनी में इंटर्नशिप के दौरान उन्हें कृषि-उद्यमिता की संभावनाओं का एहसास हुआ। किसान परिवार से आने वाली प्रणिता ने आधुनिक तकनीक से खेती करने का फैसला किया। उन्होंने 2020 में सिर्फ एक एकड़ जमीन पर पॉलीहाउस बनाकर शिमला मिर्च उगानी शुरू की।
पॉलीहाउस खेती में तापमान, नमी और अन्य परिस्थितियों को नियंत्रित किया जाता है। इससे मौसम की चुनौतियों के बावजूद कुछ फसलों की सालभर खेती संभव होती है। प्रणिता का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में लगातार अच्छी आय हासिल करने के लिए ऐसी तकनीक महत्वपूर्ण है।
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उन्होंने ब्रोकली और लेट्यूस जैसी फसलों पर भी विचार किया, लेकिन होटल और रेस्तरां में शिमला मिर्च की सालभर मांग को देखते हुए इसी फसल को चुना।
मार्च 2020 में खेती शुरू करने के कुछ ही समय बाद लॉकडाउन लग गया। प्रणिता ने सिंचाई व्यवस्था, बीज और अन्य जरूरी चीजों पर करीब 20 लाख रुपये लगाए, जबकि बाकी राशि सरकारी सब्सिडी से मिली। उस समय थोक खरीदारों की जानकारी नहीं होने के बावजूद उन्होंने एक विक्रेता खोजा, जिसने उनकी फसल खरीदी।
पहली फसल से उन्हें करीब 40 टन शिमला मिर्च मिली और पहले ही साल 32 लाख रुपये का कारोबार हुआ। अब उनका कुल कारोबार 4 करोड़ रुपये और मुनाफा 2.25 करोड़ रुपये बताया गया है। वह नासिक, दादर, जयपुर समेत कई शहरों के थोक विक्रेताओं को सीधे उपज बेचती हैं।
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