जम्मू-कश्मीर की राजनीति में ‘डिक्सन प्लान’ को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के बीच तीखी राजनीतिक तकरार छिड़ गई है। एनसी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला द्वारा पीर पंजाल और चिनाब क्षेत्रों को अलग डिवीजन का दर्जा देने की महबूबा मुफ्ती की मांग की आलोचना किए जाने के बाद यह विवाद और गहरा गया। फारूक अब्दुल्ला ने इस मांग को ‘डिक्सन प्लान’ की पुनरावृत्ति बताते हुए इसे विभाजनकारी करार दिया।
जम्मू में बातचीत करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “यह डिक्सन प्लान है। शायद आपको इसके बारे में जानकारी न हो। यह एक पुराना प्रस्ताव था, जिसमें चिनाब नदी के आधार पर विभाजन की बात कही गई थी—एक ओर ग्रेटर कश्मीर वैली और दूसरी ओर अलग क्षेत्र।”
इस बयान पर महबूबा मुफ्ती ने तुरंत पलटवार किया और नेशनल कॉन्फ्रेंस तथा भाजपा पर एक ही “पन्ने पर होने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दोनों दल इन क्षेत्रों की वैध मांगों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। महबूबा मुफ्ती ने फारूक अब्दुल्ला के ऐतिहासिक संदर्भ पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि शायद वह भूल गए हैं कि उनके पिता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को 1953 में इसी फार्मूले के गुप्त समर्थन के चलते गिरफ्तार किया गया था।
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महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट किया कि पीडीपी जम्मू-कश्मीर का विभाजन नहीं चाहती। उनका कहना था कि पीर पंजाल और चिनाब घाटी के जिले बेहद दूरदराज़ हैं, जहां के लोगों के लिए अपनी शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचाना मुश्किल होता है। इसलिए वे केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए अलग डिविजन की मांग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि डिक्सन प्लान सितंबर 1950 में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सर ओवेन डिक्सन द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान निकालना था।
इस बीच, फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू को कश्मीर से अलग करने संबंधी हालिया सुझावों को भी खारिज कर दिया और लद्दाख के अलग किए जाने का उदाहरण देते हुए ऐसे विचारों को अव्यावहारिक बताया। उन्होंने महबूबा मुफ्ती की बेरोज़गारी को लेकर की गई आलोचनाओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि आरोप लगाने से पहले आत्ममंथन जरूरी है।
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