स्टैंड-अप कॉमेडियन और लेखिका ऐश्वर्या मोहनराज द्वारा मौनजारो दवा की मदद से वजन घटाने की बात सामने आने के बाद इस इंजेक्शन को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। उन्होंने हाल ही में बताया कि पिछले साल अगस्त से शुरू किए गए साप्ताहिक इंजेक्शन की मदद से उन्होंने छह महीनों में लगभग 22 किलो वजन कम किया।
एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका शर्मा के अनुसार, मौनजारो (टिरजेपेटाइड) मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए विकसित किया गया था और इसे केवल कॉस्मेटिक वजन घटाने की दवा समझना गलत है। यह दवा इन्क्रेटिन हार्मोन (GLP-1 और GIP रिसेप्टर) पर काम करती है, जिससे ब्लड शुगर, भूख और मेटाबॉलिज्म नियंत्रित होते हैं। क्लिनिकल ट्रायल में वजन घटने के अच्छे परिणाम मिलने के बाद इसका उपयोग मोटापे के इलाज में भी होने लगा।
डॉ. शर्मा बताती हैं कि यह दवा पेट के खाली होने की प्रक्रिया धीमी कर देती है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है और भूख कम लगती है। साथ ही यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाकर शरीर में फैट स्टोरेज और ऊर्जा उपयोग को बेहतर बनाती है। इसके कारण मरीज कम भोजन लेते हैं और धीरे-धीरे वजन घटता है।
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हालांकि, डॉक्टर चेतावनी देती हैं कि मौनजारो केवल विशेषज्ञ की निगरानी में ही लेना चाहिए। शुरुआती साइड इफेक्ट्स में मतली, उल्टी, दस्त, कब्ज और थकान शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में पैंक्रियाटाइटिस, पित्ताशय या थायरॉयड से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी रहता है।
यह दवा हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। गर्भवती महिलाओं, गंभीर पेट रोग, पैंक्रियाटाइटिस या थायरॉयड कैंसर के इतिहास वाले लोगों को इससे बचना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि दवा बंद करने के बाद यदि जीवनशैली नहीं सुधारी गई तो वजन वापस बढ़ सकता है। इसलिए मौनजारो को स्थायी समाधान नहीं बल्कि चिकित्सकीय निगरानी में सहायक उपचार माना जाना चाहिए।
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