महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के भीतर जारी उठापटक के बीच अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) को लेकर भी नई अटकलें शुरू हो गई हैं। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के नेताओं ने दावा किया है कि शरद पवार गुट के कई सांसद और विधायक उनके संपर्क में हैं। इस दावे के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक और संभावित सियासी विभाजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यह दावा एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा धर्माराव आत्राम ने किया है। अजित पवार गुट के नेताओं का कहना है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के कई जनप्रतिनिधि उनके साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि, अभी तक शरद पवार गुट के किसी सांसद या विधायक ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी बातचीत की पुष्टि नहीं की है।
वर्तमान में एनसीपी (एसपी) के पास कुल नौ सांसद हैं, जिनमें आठ लोकसभा और एक राज्यसभा सदस्य शामिल हैं। दल-बदल विरोधी कानून के तहत यदि संसदीय दल में विभाजन होता है तो कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। इसका मतलब है कि आठ लोकसभा सांसदों में से कम से कम छह सांसदों का साथ होना जरूरी होगा।
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एनसीपी (एसपी) के प्रमुख लोकसभा सांसदों में सुप्रिया सुले, अमोल कोल्हे, बजरंग सोनवणे, निलेश लंके, सुरेश म्हात्रे, अमर काले, भास्कर भगारे और धैर्यशील मोहिते-पाटिल शामिल हैं।
यह अटकलें ऐसे समय में सामने आई हैं जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) भी बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। खबरों के मुताबिक, पार्टी के छह सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने राजनीतिक दल-बदल की राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नेताओं को बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, जल संकट और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जनता से ऐसे नेताओं को लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने की अपील भी की जो जनादेश के साथ विश्वासघात करते हैं।
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