नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई। इस आपदा में कम से कम 178 लोगों की मौत हो गई, जबकि 800 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ ने पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं और रास्ते में आने वाली कई संरचनाओं को बहा दिया।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि हजारों परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं और बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। सरकार आपदा से हुए नुकसान का पूरा आकलन करने में जुटी है।
इस बीच बाढ़ की वजह को लेकर नेपाल और चीन के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। नेपाल के कुछ पत्रकारों ने दावा किया कि किसी भूगर्भीय आपदा के कारण बांध जैसी संरचना ढहने से अचानक बाढ़ आई। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि चीन की ओर से समय रहते चेतावनी जारी की जाती तो नुकसान को कम किया जा सकता था।
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नेपाल के पत्रकार परशुराम काफ्ले ने चीन की प्रारंभिक चेतावनी व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनद झील के फटने से जुड़ी घटनाओं की निगरानी और पूर्व चेतावनी के लिए चीन के पास मजबूत प्रणाली है।
चीन ने आरोपों को बताया गलत
चीनी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें फर्जी खबर बताया। चीनी दूतावास ने कहा कि इस समय एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय जान बचाने के लिए सहयोग और समन्वय जरूरी है।
दूतावास के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह नेपाल की ओर भूकंप जैसी ग्लेशियर ढहने की घटना हुई, जिससे भारी मलबे के साथ अचानक बाढ़ आई और नेपाल-चीन सीमा के जिरोंग-रसुवागढ़ी क्षेत्र में दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने क्या कहा?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, शुरुआती तौर पर इसे 5.2 तीव्रता का भूकंप माना गया था। लेकिन आसपास के भूकंपीय केंद्रों के आंकड़ों, लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों और उपग्रह तस्वीरों के अतिरिक्त विश्लेषण के बाद निष्कर्ष निकाला गया कि कोई भूकंप नहीं आया था।
यूएसजीएस ने बताया कि वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और मलबे के प्रवाह के कारण यह विनाशकारी घटना हुई।
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