नेपाल में गुरुवार को आम चुनाव होने जा रहे हैं, जो पिछले वर्ष युवा-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद पहला राष्ट्रीय मतदान होगा। इस आंदोलन के दौरान जनरेशन Z ने प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की विदाई का मार्ग प्रशस्त किया था। देश में 18.9 मिलियन से अधिक योग्य मतदाता प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों का चुनाव करेंगे। इनमें से 165 सीटें प्रत्यक्ष मतदान के जरिए भरी जाएंगी, जिनके लिए 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि शेष 110 सीटें अनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर दी जाएंगी, जिनमें 3,135 उम्मीदवार शामिल हैं।
चुनाव अभियान आधिकारिक तौर पर सोमवार, 2 मार्च की मध्यरात्रि को समाप्त हुआ। मतदान गुरुवार, 5 मार्च को सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा।
पिछले साल सितंबर में हुए राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद यह चुनाव और भी महत्वपूर्ण बन गया। 8 और 9 सितंबर को युवा प्रदर्शनकारियों ने बेहतर शासन, भाई-भतीजावाद समाप्ति, नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव और भ्रष्टाचार पर कड़ा कदम उठाने की मांग की। इन प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री ओली ने इस्तीफा दिया, जो तब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) – CPN-UML के अध्यक्ष और कांग्रेस समर्थित गठबंधन सरकार के नेता थे।
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राज्यपती रामचन्द्र पौडेल ने 12 सितंबर को प्रतिनिधि सभा भंग की और सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
मुख्य प्रत्याशी और युवा वोटरों पर केंद्रित वादे:
नए और पुनर्गठित राजनीतिक दल युवाओं की मांगों को प्रमुखता दे रहे हैं। राष्टïय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने और वरिष्ठ नेता बलेंद्र शाह, और नवजीवित नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा, Gen Z वोटरों की आवाज बनकर उभर रहे हैं।
परंपरागत दल अभी भी अपने स्थापित आधार पर निर्भर हैं। CPN-UML के ओली और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ मुख्य रूप से पुराने और दीर्घकालिक समर्थकों से लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों में, RSP ने पूर्व काठमांडू मेयर 35 वर्षीय बलेन को चुना, नेपाली कांग्रेस ने 49 वर्षीय गगन थापा को उम्मीदवार बनाया, जबकि CPN-UML 75 वर्षीय ओली पर भरोसा कर रहा है।
इस चुनाव में युवा और पारंपरिक राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है, और युवा मतदाता देश के नेतृत्व के भविष्य में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
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