अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए प्रस्तावित शांति समझौता अब नए संकट में फंस गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस समझौते के लेबनान से जुड़े प्रावधानों को मानने से इनकार कर दिया है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और युद्धविराम स्थापित करने के लिए अंतिम समझौते की तैयारी चल रही है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को इस प्रस्तावित समझौते की जानकारी दी थी, जो 19 जून को हस्ताक्षर के लिए तैयार है। लेकिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया कि इज़राइल किसी भी ऐसी शर्त को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके सैन्य अभियानों को लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सीमित करे। उन्होंने अमेरिका से तत्काल बैठक की भी मांग की है ताकि इज़राइल अपना पक्ष स्पष्ट कर सके।
इज़राइल का कहना है कि उसकी सेना लेबनान में अपनी सुरक्षा रणनीति के तहत कार्रवाई जारी रखेगी। इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, हिज़्बुल्लाह अब भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है और ऐसे में सैन्य कार्रवाई रोकना संभव नहीं है।
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दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि किसी भी स्थायी शांति समझौते में लेबनान में पूरी तरह से सैन्य गतिविधियों को रोकना शामिल होना चाहिए। इस मुद्दे पर इज़राइल और ईरान के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आ गए हैं।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि बेरूत में इज़राइली हमले के बाद तनाव और बढ़ गया, जिससे ट्रंप नाराज बताए जा रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि यह कदम कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकता है।
ट्रंप ने नेतन्याहू को “बहुत कठिन नेता” बताते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा किए जा रहे शांति प्रयासों को समझना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियारों से रोकना इज़राइल के हित में है, अन्यथा क्षेत्रीय सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है।
फिलहाल यह समझौता एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, लेकिन इज़राइल की आपत्तियों ने इसके भविष्य को अनिश्चित बना दिया है।
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