जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि उन्हें और उनके समर्थकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका गया, लेकिन इससे उनकी आवाज दबने वाली नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हमें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया और उस अधिकार के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से भी रोक दिया गया, जो हमारा वैधानिक अधिकार है। लेकिन हमारी आवाज को खामोश नहीं किया जा सका। यह राज्य का दर्जा, हमारे अधिकारों, हमारी गरिमा और हमारे भविष्य की लड़ाई की सिर्फ शुरुआत है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकार वापस मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करना केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनता के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
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उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं देना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और समर्थक संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी मांग उठाते रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्य का दर्जा बहाल होने से प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूती मिलेगी तथा जनता की अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन यह जनता के अधिकारों और सम्मान के लिए है।
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर केंद्र सरकार से मांग करते रहे हैं। उमर अब्दुल्ला के ताजा बयान के बाद राज्य के दर्जे को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है।
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