स्विट्ज़रलैंड स्थित सेंटर फॉर मिलिट्री हिस्ट्री एंड पर्सपेक्टिव स्टडीज़ (CHPM) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) ने 10 मई 2025 की सुबह तक पाकिस्तान के बड़े हिस्से के हवाई क्षेत्र पर वायु वर्चस्व स्थापित कर लिया था। इस वायु वर्चस्व के कारण IAF को दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर लंबी दूरी से सटीक हमले करने की पर्याप्त सफलता मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, वायु वर्चस्व हासिल होने के बाद भारतीय वायु सेना ने दुश्मन के बुनियादी ढांचे, कमांड एंड कंट्रोल सेंटरों और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए प्रभावी हमले किए। इससे पाकिस्तान की जवाबी क्षमताएं सीमित हो गईं और क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत हुई।
यह रिपोर्ट सैन्य इतिहासकार एड्रियन फोंटानेलाज द्वारा लिखी गई है। इसमें कहा गया है कि भारत की स्टैंड-ऑफ अटैक (दूरी से हमला करने की क्षमता) को बनाए रखने में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों की अहम भूमिका रही। खासतौर पर ब्रह्मोस और SCALP-EG क्रूज़ मिसाइलों जैसी उन्नत गोला-बारूद प्रणालियों ने भारतीय वायु सेना को सुरक्षित दूरी से लक्ष्य भेदने में सक्षम बनाया।
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रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि इन आधुनिक मिसाइल प्रणालियों की उपलब्धता ने IAF को दुश्मन के हवाई रक्षा तंत्र के भीतर प्रवेश किए बिना ही सटीक हमले करने का लाभ दिया। इससे न केवल विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई, बल्कि अभियान की निरंतरता भी बनी रही।
विश्लेषकों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर भारत की वायु शक्ति, तकनीकी क्षमता और रणनीतिक योजना का स्पष्ट उदाहरण है। CHPM की यह रिपोर्ट दक्षिण एशिया में बदलते सुरक्षा संतुलन और आधुनिक युद्ध में उन्नत हथियार प्रणालियों की भूमिका को भी उजागर करती है।
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