दिल्ली में पिछले छह वर्षों के दौरान आग की घटनाओं में 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिससे राजधानी की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टेज़ बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) में लगी भीषण आग ने एक बार फिर फायर सेफ्टी मानकों की पोल खोल दी है।
इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 अन्य घायल हो गए। घटना के बाद दिल्ली में होटल, गेस्ट हाउस और व्यावसायिक इमारतों में सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित इमारत में कई सुरक्षा खामियां थीं। रिपोर्टों के अनुसार, भवन के पास आवश्यक फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं था। इसके अलावा, भवन में केवल एक प्रवेश और निकास मार्ग था, खिड़कियां स्थायी रूप से बंद थीं और मुख्य प्रवेश द्वार सेंसर आधारित था, जिससे आपातकालीन स्थिति में लोगों को बाहर निकलने में भारी कठिनाई हुई।
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विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच कई इमारतों में अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में आग की घटनाएं सामने आती हैं और लोगों की जान जाती है।
मालवीय नगर हादसे के बाद प्रशासन ने राजधानी में फायर सेफ्टी मानकों की समीक्षा शुरू कर दी है। सरकार और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी व्यावसायिक और आवासीय भवनों की सुरक्षा जांच की जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। दिल्ली में लगातार हो रही आग की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अग्नि सुरक्षा को लेकर व्यापक सुधार और सतर्कता की आवश्यकता है।
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