भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र के बीच भारतीय पायलटों के महासंघ ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महानिदेशालय नागरिक उड्डयन यानी डीजीसीए की जगह एक स्वायत्त और वैधानिक नागरिक उड्डयन प्राधिकरण बनाने की मांग की है।
भारतीय पायलटों के महासंघ के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने प्रधानमंत्री को भेजे विस्तृत प्रस्ताव में कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है। इसके बावजूद देश का विमानन नियमन अभी भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन एक संलग्न कार्यालय डीजीसीए के जरिए संचालित हो रहा है।
महासंघ के अनुसार, डीजीसीए ने लंबे समय से भारतीय हवाई क्षेत्र की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन विमानन क्षेत्र के तेजी से विस्तार ने मौजूदा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। भारत में वाणिज्यिक विमानों का बेड़ा 850 से अधिक हो चुका है और यात्रियों की संख्या 23.9 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई है। इसके अलावा ड्रोन और उन्नत हवाई परिवहन जैसी नई तकनीकें भी तेजी से विकसित हो रही हैं।
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एफआईपी ने मौजूदा ढांचे में संस्थागत स्वतंत्रता की कमी को बड़ी समस्या बताया। संगठन के मुताबिक महत्वपूर्ण नियामकीय फैसलों और वित्तीय खर्च के लिए सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होने से प्रक्रिया धीमी होती है। साथ ही सरकारी वेतन व्यवस्था के कारण एयरलाइन कैप्टन, उड़ान संचालन निरीक्षक और विमान उड़ान-योग्यता इंजीनियर जैसे विशेषज्ञों को आकर्षित करना और बनाए रखना मुश्किल है।
वित्तीय स्वतंत्रता की मांग
एफआईपी ने डीजीसीए की वित्तीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। संगठन ने कहा कि ब्रिटेन, सिंगापुर और कई पड़ोसी देशों में विमानन नियामक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, जबकि डीजीसीए से मिलने वाला राजस्व भारत की संचित निधि में चला जाता है। इससे नियामक वार्षिक बजट आवंटन पर निर्भर रहता है।
एफआईपी ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में स्वायत्त वैधानिक नागरिक उड्डयन प्राधिकरण काम कर रहे हैं। प्रस्ताव में अलग नागरिक उड्डयन प्राधिकरण कोष, उपयोगकर्ता शुल्क और लाइसेंस शुल्क से वित्त पोषण, विशेषज्ञों की बाजार आधारित नियुक्ति तथा उड़ान सुरक्षा, विमान उड़ान-योग्यता, हवाई यातायात, उपभोक्ता मामलों और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों वाला पेशेवर बोर्ड बनाने की सिफारिश की गई है।
संगठन ने यात्रियों की शिकायतों, पर्यावरण अनुपालन और विमान शोर नियंत्रण के लिए भी विशेष व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है।
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