मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता दरख्शां हसन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में कथित नागरिक हत्याओं और इंटरनेट बंदी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं पाकिस्तान की नीतिगत विफलताओं को उजागर करती हैं और क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
दरख्शां हसन ने कहा कि पीओके में नागरिकों की मौत की खबरें बेहद चिंताजनक और निराशाजनक हैं। उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन पीओके में सामने आ रही घटनाएं इसके विपरीत तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट सेवाओं को बंद करना और लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश करना स्थिति को और गंभीर बना देता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों की हत्या और संचार माध्यमों पर प्रतिबंध किसी भी क्षेत्र में असंतोष और अविश्वास को बढ़ाते हैं। हसन के अनुसार, ऐसी घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।
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मानवाधिकार कार्यकर्ता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह पीओके में मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान दे और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज में शांति और स्थिरता तभी संभव है, जब नागरिकों के अधिकारों का सम्मान किया जाए और शासन व्यवस्था पारदर्शी हो।
दरख्शां हसन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पीओके में सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। उनके अनुसार, इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं।
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