पंजाब बीजेपी कार्यालय में बुधवार को 30 कुर्सियां खाली रखी गईं। हर कुर्सी पर एक नाम लिखा था। पार्टी के अनुसार, ये उन युवाओं के नाम थे, जिनकी मौत नशे की वजह से हुई।
यह कार्यक्रम 18 सितंबर से शुरू होने वाली बीजेपी की नशा मुक्त पंजाब यात्रा से एक दिन पहले आयोजित किया गया। यात्रा राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त होगी।
कार्यक्रम में नशे की लत के कारण अपने परिजनों को खो चुके 30 से अधिक परिवार पहुंचे। माता-पिता और भाई-बहनों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके बेटे और भाई वापस नहीं लौटे और परिवारों को लगता है कि राज्य सरकार ने वर्षों से पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
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पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाने का उसका वादा जमीन पर प्रभावी नहीं दिख रहा।
इस दौरान तूर बंजारा गांव के गुलजार सिंह का नाम भी सामने आया। बीजेपी नेताओं का दावा है कि उन्होंने अपने बेटे के नशे की गिरफ्त में आने के बाद इलाके में नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर राज्य मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सार्वजनिक रूप से सवाल किया था। बीजेपी ने आरोप लगाया कि उन्हें परेशान किया गया और बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली। सरकार ने इस दावे को खारिज किया है और मामले की जांच जारी है।
बीजेपी ने नशे, तस्करी, अपराध, जबरन वसूली और साझा सुइयों से एचआईवी संक्रमण का मुद्दा उठाया। वहीं, मान सरकार ने अपनी कार्रवाई के परिणामों का दावा करते हुए बीजेपी पर संकट का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।
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