अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह फैसला श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के औपचारिक अनुरोध के बाद लिया।
सरकार के अनुसार, ट्रस्ट ने मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा था कि मंदिर की छवि को धूमिल करने और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में सच्चाई सामने लाने और भ्रामक सूचनाओं पर रोक लगाने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
गठित एसआईटी में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। इनमें लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (रेंज) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। टीम को जल्द से जल्द प्रारंभिक और अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
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इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में उन खबरों पर चिंता जताई थी, जिनमें दावा किया गया था कि राम मंदिर के लिए प्राप्त करोड़ों रुपये के चढ़ावे का हिसाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि यह करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। उन्होंने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आंतरिक ऑडिट की प्रक्रिया जारी है और अब तक किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का कोई प्रमाण नहीं मिला है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि नियमित रूप से ऑडिट में शामिल होते हैं।
ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने भी कहा कि सरकार द्वारा कराई जाने वाली किसी भी जांच का ट्रस्ट पूरा सहयोग करेगा।
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