भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील और लातूर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (डीसीसी बैंक) के सात अन्य निदेशकों को पद से हटाने का आदेश दिया है। इन निदेशकों पर 10 वर्ष की अधिकतम कार्यकाल सीमा पार करने का मामला है।
बाबासाहेब पाटील उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से जुड़े हैं। आरबीआई का यह आदेश बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ के निर्देश के बाद आया है। कोर्ट ने बैंक सदस्य सतीश शेषराव जाधव की याचिका पर आरबीआई को कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
आरबीआई के सहायक महाप्रबंधक कपिल गोस्वामी ने शुक्रवार को आदेश जारी किया। बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में 2025 के संशोधन के तहत जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए अधिकतम 10 वर्ष का कार्यकाल निर्धारित किया गया है।
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सतीश जाधव ने 25 मई 2026 को आरबीआई के मुख्य महाप्रबंधक के पास शिकायत देकर लातूर डीसीसी बैंक के आठ निदेशकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने 21 जून को बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। 3 अगस्त को अदालत ने आरबीआई को छह सप्ताह के भीतर शिकायत पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
आरबीआई ने 4 सितंबर को संबंधित निदेशकों से 10 सितंबर तक जवाब मांगा था। इसके बाद सात निदेशकों—अशोक शिवाजीराव पाटील निलंगेकर, श्रीपतराव निवृत्तिराव काकड़े, स्वयंप्रभा धनंजय पाटील, व्यंकटराव धोंडीराम बिराजदार, पृथ्वीराज हरिश्चंद्र शिरसाट, प्रमोद जाधव और नागोराव पाटील—ने इस्तीफा दे दिया।
18 सितंबर को आरबीआई ने लातूर डीसीसी बैंक को बैंकिंग विनियमन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अयोग्य निदेशक को पद से हटाने का निर्देश दिया।
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