कर्नाटक हाईकोर्ट ने शिवशंकरप्पा साहूकार को कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी केपीएससी के अध्यक्ष पद पर सात दिनों के भीतर बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से उनके पद पर वापसी का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने बहाली के साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी तय की हैं। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि शिवशंकरप्पा साहूकार अपनी बेटी की भर्ती से जुड़े किसी भी मामले में कोई निर्णय नहीं ले सकेंगे। साथ ही, वे इस प्रक्रिया से जुड़े किसी भी अधिकारी या अन्य व्यक्ति को प्रभावित करने की कोशिश भी नहीं करेंगे।
अदालत ने कहा कि बेटी की भर्ती से संबंधित मामले में सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा। इस तरह अदालत ने एक ओर साहूकार की पद पर बहाली का आदेश दिया, वहीं दूसरी ओर हितों के टकराव की आशंका को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया से उन्हें दूर रखने की व्यवस्था की है।
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केपीएससी राज्य में विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं और चयन प्रक्रिया संचालित करता है। ऐसे में आयोग के अध्यक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अध्यक्ष की नियुक्ति और उनके कामकाज से जुड़े विवादों का असर भर्ती प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब संबंधित अधिकारियों को सात दिनों के भीतर साहूकार की बहाली की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही, बेटी की भर्ती से जुड़े मामले में अदालत द्वारा तय की गई सीमाओं का पालन करना होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है। इससे संबंधित भर्ती मामले में जांच या अन्य कानूनी प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। हाईकोर्ट के इस फैसले को केपीएससी के कामकाज और भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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