भारत के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 मार्च, 2026) को लखनऊ के अधिवक्ता अशोक पांडे द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। पांडे ने केंद्र को निर्देश देने की मांग की थी कि उन्हें छह मामलों को दायर करने के लिए ₹1 करोड़ फीस और खर्च दिए जाएं, जो उन्होंने 2018 में तब के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा को कथित रूप से ‘बचाने’ के लिए दायर किए थे।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पञ्चोली की पीठ ने याचिका को "पूरी तरह से भ्रांतिपूर्ण" बताया। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका, इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के पिछले साल मार्च के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने भी पांडे की मांग को खारिज कर दिया था।
पांडे ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि उन्होंने छह केस दायर किए ताकि तत्कालीन CJI मिश्रा का बचाव किया जा सके। उन्होंने कहा कि इन मामलों में उन्हें ₹2 लाख का खर्च उठाना पड़ा, जो उन्होंने अपनी बेटी से लिया।
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चीफ जस्टिस ने पूछा, "न्यायाधीशों पर तरह-तरह के आरोप लगाने के बाद आप अब 'माननीय' शब्द का उपयोग क्यों कर रहे हैं?" उन्होंने पांडे को समझाया कि सामाजिक सेवा का कोई मूल्य नहीं लगाया जा सकता। पीठ ने कहा, "आपने संस्था के लिए सामाजिक सेवा की है। अगर आप सराहना चाहते हैं, तो हम उसके लिए आपको सराहना देते हैं।"
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले, पांडे ने जुलाई 2024 में कानून और न्याय मंत्रालय के आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसमें उनके ₹1 करोड़ फीस और खर्च का दावा खारिज किया गया था।
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