ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से पहले कांग्रेस के भीतर ही समूह की उपयोगिता को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम द्वारा हालिया ब्रिक्स सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस लाभ पर सवाल उठाए जाने के एक दिन बाद पार्टी सांसद शशि थरूर ने संगठन के कूटनीतिक महत्व की तारीफ की।
दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले शशि थरूर ने कहा कि ब्रिक्स भारत की “कूटनीतिक आयोजन क्षमता” को दर्शाता है। उन्होंने इसे ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया। थरूर के मुताबिक, ग्लोबल साउथ में 100 से अधिक देश हैं, लेकिन ब्रिक्स के मंच पर 11 प्रमुख देश अपनी विविध विचारधाराओं और हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
थरूर ने कहा कि ब्रिक्स के 11 सदस्य देश दुनिया की आबादी के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 41 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। ऐसे में भारत के लिए इस समूह की मेजबानी करना और इसकी अध्यक्षता करना महत्वपूर्ण है।
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उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कोई छोटी उपलब्धि नहीं है और दुनिया को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। थरूर ने इसे भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय बताते हुए कहा कि सम्मेलन का वैश्विक महत्व काफी अधिक है।
इससे पहले पी. चिदंबरम ने कहा था कि भारत ब्रिक्स के अलावा शंघाई सहयोग संगठन, जी20 और क्वाड जैसे कई बहुपक्षीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि इन संगठनों से देश को वास्तविक और ठोस लाभ क्या मिला है। उन्होंने कहा था कि पिछले दो-तीन ब्रिक्स सम्मेलनों से भारत को कोई महत्वपूर्ण ठोस परिणाम मिला हो, ऐसा उन्हें दिखाई नहीं देता।
चिदंबरम की टिप्पणी पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने उन पर भारत के विकास को स्वीकार नहीं कर पाने का आरोप लगाया और उन्हें “नाराज फूफा” वाले समूह का हिस्सा बताया।
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत ने 1 जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। इस वर्ष की थीम “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” है। सम्मेलन में 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधियों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
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