जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अपने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की शर्तें स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह स्पष्ट आश्वासन देती है कि आंदोलन में शामिल किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तभी वह अपना अनशन समाप्त करेंगे।
सोनम वांगचुक ने यह पत्र केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को संबोधित किया है। दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने मंगलवार को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में उनसे मुलाकात की थी और स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था।
पत्र में वांगचुक ने मंत्रियों के अस्पताल आकर मुलाकात करने और बातचीत करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान सरकार ने उनकी दो प्रमुख मांगों पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया। इनमें कथित परीक्षा पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने तथा संसद में इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा कर जवाबदेही तय करने, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भी विचार शामिल है, जैसी बातें शामिल थीं।
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वांगचुक ने 20 जुलाई के "संसद चलो" मार्च और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग के बावजूद आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
उन्होंने लिखा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने और देश की सेवा में लौटने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि वह भी अपना जीवन शिक्षा और छात्रों के लिए समर्पित करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा उन युवाओं की कीमत पर नहीं कर सकते जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ।
पत्र में उन्होंने कहा, "मैं जीना चाहता हूं, अपने छात्रों और शिक्षा के कार्य में लौटना चाहता हूं। लेकिन सरकार को यह स्पष्ट आश्वासन देना होगा कि इस आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ प्रतिशोधात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि ऐसा आश्वासन मिलता है तो मैं विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर दूंगा। अन्यथा मुझे अपना अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रखना पड़ेगा।"
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन कथित नीट पेपर लीक मामले, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी है।
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