वैज्ञानिकों ने सुपर एल नीनो को लेकर चेतावनी जारी की है। नए पूर्वानुमानों के मुताबिक यह शक्तिशाली जलवायु घटना अगले साल तक वैश्विक मौसम पर अपना असर बनाए रख सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में जमा भारी मात्रा में गर्मी बाहर निकलने के कारण दुनिया के बड़े हिस्से में असामान्य रूप से गर्म परिस्थितियां बन सकती हैं।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के ताजा अपडेट के अनुसार, दिसंबर में संभावित चरम स्तर पर पहुंचने से पहले एल नीनो के और मजबूत होने की संभावना है। संगठन ने कहा कि आने वाले महीनों में इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के तापमान और बारिश पर पड़ सकता है।
मौसम विज्ञानियों द्वारा साझा किए गए नक्शों में दुनिया के बड़े हिस्से लाल रंग में दिखाई दे रहे हैं, जो सामान्य से अधिक तापमान की बढ़ी हुई संभावना को दर्शाते हैं। डब्ल्यूएमओ के अनुसार, अगले वर्ष फरवरी तक एल नीनो के बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत है।
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अमेरिकी मौसम विज्ञानी रयान माउ ने कहा कि नए नक्शों में धरती लगभग पूरी तरह लाल दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि एल नीनो सर्दियों तक “अधिकतम शक्ति” पर बना रह सकता है।
जलवायु वैज्ञानिक ज़ीके हॉसफादर ने भी कहा कि इस वर्ष का एल नीनो अब ऐसे स्तर पर पहुंच रहा है, जहां पहले के रिकॉर्ड से तुलना करना मुश्किल है। उनके अनुसार, नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से लगभग 3.4 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया है।
डब्ल्यूएमओ ने अनुमान लगाया है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है।
एल नीनो, एल नीनो-दक्षिणी दोलन चक्र का गर्म चरण है। यह वैश्विक तापमान बढ़ाने के साथ बारिश के सामान्य पैटर्न को प्रभावित करता है। इसके कारण कुछ क्षेत्रों में सूखा, जबकि अन्य जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। यह घटना आमतौर पर हर दो से सात साल में सामने आती है।
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