भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी मानवाधिकार अधिवक्ता नवानथम ‘नवी’ पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि पिल्लै को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया है।
समिति के अनुसार, नवी पिल्लै ने राज्यों और राष्ट्रीय नेताओं को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से हिंसा और संघर्ष के पीड़ितों को उम्मीद मिली है। समिति ने कहा कि पिल्लै ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तियों और देशों को कानून के शासन का पालन करना चाहिए।
समिति ने उनके लंबे करियर और सार्वभौमिक कानूनी सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। रंगभेद के खिलाफ संघर्ष के दौरान नेल्सन मंडेला और अन्य लोगों का बचाव करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई तक, उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
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कौन हैं नवी पिल्लै?
नवी पिल्लै का जन्म 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय मूल के परिवार में हुआ था। उन्होंने रंगभेद के दौर में अपना बचपन बिताया। तमाम भेदभाव और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की और दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने वाली भारतीय मूल की शुरुआती महिलाओं में शामिल हुईं। उन्होंने 1965 में कानून की स्नातक डिग्री हासिल की।
अपने करियर के दौरान पिल्लै ने रंगभेद विरोधी अभियानों में भाग लिया और भेदभावपूर्ण कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में भी काम किया।
इसके अतिरिक्त, वह गाम्बिया बनाम म्यांमार मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की तदर्थ न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। वह अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्ष भी हैं।
नोबेल पुरस्कार पाने वाले भारतीय मूल के अन्य लोग
भारतीय मूल के कई लोगों को पहले भी नोबेल पुरस्कार मिल चुका है। इनमें हर गोबिंद खुराना, सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर, वेंकटरमन रामकृष्णन, वी.एस. नायपॉल और अभिजीत बनर्जी शामिल हैं। भारतीय नागरिकों में रवींद्रनाथ टैगोर, सी.वी. रमन, मदर टेरेसा, अमर्त्य सेन और कैलाश सत्यार्थी को भी यह प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुका है।
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