सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में रहने वाले उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई और केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे को हल्के में लेना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि उत्तर-पूर्व के नागरिकों को आज भी नस्लीय भेदभाव, सामाजिक अलगाव और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता है। अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सरकार ने अब तक इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं।
न्यायालय ने केंद्र से पूछा कि इस प्रकार के मामलों को रोकने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए क्या ठोस उपाय किए गए हैं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले नागरिकों के साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है और यह संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
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याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उत्तर-पूर्व के लोगों को अक्सर उनकी शारीरिक बनावट और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के कारण निशाना बनाया जाता है। उन्हें रोजगार, आवास और सार्वजनिक स्थानों पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेने और प्रभावी नीतियां बनाने की जरूरत है ताकि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान मिल सके।
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