जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच लंबे समय से चल रहा वैवाहिक विवाद अब समाप्त होने की ओर बढ़ गया है। शुक्रवार को दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मध्यस्थता (मेडिएशन) के माध्यम से उनके बीच सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझ गए हैं। इसके बाद शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि वह समझौते की शर्तों के अनुरूप विवाह समाप्त करने का आदेश पारित करेगी।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को अदालत के आदेश का हिस्सा बनाया जाएगा और उसी आधार पर मामले का निस्तारण किया जाएगा।
उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों ने सभी मतभेद सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिए हैं और अब वे अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने अदालत से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत तलाक की डिक्री जारी करने का अनुरोध किया। सिब्बल ने कहा, "दोनों ने स्वतंत्र जीवन अपनाने का निर्णय लिया है। सभी विवाद समाप्त हो चुके हैं।"
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अदालत को बताया गया कि इस संबंध में संयुक्त आवेदन 22 जुलाई को दाखिल किया गया था और समझौते के बाद अन्य सभी लंबित मामलों को भी वापस ले लिया जाएगा।
यह मामला वर्ष 2023 में तब फिर चर्चा में आया था, जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अपनी याचिका में उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि उनका वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुका है। उनका विवाह 1 सितंबर 1994 को हुआ था, लेकिन वर्ष 2007 के बाद से दोनों के बीच वैवाहिक संबंध नहीं रहे और वर्ष 2009 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं।
इससे पहले वर्ष 2016 में पारिवारिक अदालत ने भी उनकी तलाक याचिका खारिज कर दी थी। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उस फैसले को बरकरार रखते हुए पायल अब्दुल्ला के लिए 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। अब मध्यस्थता के जरिए हुए समझौते के बाद इस लंबे कानूनी विवाद के समाप्त होने का रास्ता साफ हो गया है।
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