थाईलैंड में रविवार (8 फरवरी 2026) को आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया, जिसमें पिछली बार सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाले सुधारवादी दल और वर्तमान प्रधानमंत्री बने रूढ़िवादी खेमे के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है। इस चुनाव पर पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा की छाया भी बनी हुई है, जो फिलहाल जेल में हैं।
देश की अगली सरकार को कंबोडिया के साथ लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद से भी निपटना होगा, जो पिछले साल दो बार हिंसक झड़पों में बदल गया था। मतदान करने पहुंचे पहले मतदाता यूर्नयोंग लूनबूट ने कहा कि सीमा विवाद के कारण लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है और देश को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है।
थाई अर्थव्यवस्था भी धीमी गति से बढ़ रही है। पर्यटन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन कोविड से पहले के स्तर तक पर्यटकों की वापसी अभी तक नहीं हो पाई है। इसके अलावा पड़ोसी देशों में सक्रिय साइबर ठगी नेटवर्क भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना कम है और चुनाव परिणाम के बाद गठबंधन वार्ता जरूरी होगी। पिछले चुनाव में प्रगतिशील मूव फॉरवर्ड पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं, लेकिन उनके उम्मीदवार को प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया गया और बाद में पार्टी को भंग कर दिया गया।
थाकसिन की पार्टी फेउ थाई ने 2023 में दूसरे स्थान पर रहते हुए गठबंधन सरकार बनाई थी, लेकिन उसके प्रधानमंत्री को अदालत के आदेश से हटाया गया। बाद में उनकी बेटी पैटोंगटार्न शिनावात्रा भी पद से हटा दी गईं और सितंबर में संसद ने भुमजैथाई पार्टी के नेता अनुतिन को प्रधानमंत्री बनाया।
थाईलैंड का राजनीतिक इतिहास सैन्य तख्तापलट, विरोध प्रदर्शनों और न्यायिक हस्तक्षेप से भरा रहा है। चुनाव के साथ एक जनमत संग्रह भी हो रहा है, जिसमें मतदाता संवैधानिक सुधार पर अपनी राय दे सकेंगे।
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