पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर एक बड़ी जलविद्युत परियोजना की शुरुआत कर दी है। सरकार ने 5,129 करोड़ रुपये की लागत वाली सावलकोट जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी है, जो इस क्षेत्र में इस तरह की पहली नई परियोजना है।
राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (एनएचपीसी) के दस्तावेजों के अनुसार, 5 फरवरी को कंपनियों से इस मेगा परियोजना के निर्माण के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और रामबन जिलों में विकसित की जाएगी और इसे रणनीतिक व ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
सावलकोट जलविद्युत परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में 1,406 मेगावाट क्षमता की इकाई स्थापित की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में 450 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी। इस प्रकार यह परियोजना कुल मिलाकर क्षेत्र की ऊर्जा आवश्यकताओं को मजबूती प्रदान करेगी।
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यह परियोजना चेनाब नदी पर बगलिहार परियोजना के नीचे और सलाल परियोजना के ऊपर स्थित होगी। इसे “रन ऑफ द रिवर” श्रेणी की परियोजना के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें बड़े पैमाने पर जल भंडारण की आवश्यकता नहीं होती और पर्यावरणीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम माना जाता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना से न केवल जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही, यह परियोजना क्षेत्रीय विकास और बुनियादी ढांचे को भी गति देगी।
सावलकोट परियोजना को लंबे समय से लंबित माना जा रहा था, लेकिन मौजूदा नीतिगत फैसलों के बाद अब इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है। इसे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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