भारत की बैडमिंटन जोड़ी ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला युगल वर्ग में अपना पहला कांस्य पदक हासिल किया। शनिवार को सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर एक और मौजूदा चैंपियन चीन की लियू शेंग शू और तान निंग की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में हार के साथ भारतीय जोड़ी का सफर समाप्त हुआ।
गैरवरीयता प्राप्त ट्रीसा और गायत्री ने सेमीफाइनल में जबरदस्त शुरुआत करते हुए पहला गेम 21-18 से अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने शुरुआत में विश्व की शीर्ष जोड़ी पर लगातार दबाव बनाया और अपने आक्रामक खेल से मुकाबले में बढ़त हासिल की। हालांकि, चीनी खिलाड़ियों ने दूसरे गेम में शानदार वापसी की और 21-13 से गेम जीतकर मुकाबला बराबरी पर ला दिया।
निर्णायक तीसरे गेम में लियू शेंग शू और तान निंग ने अपनी गति और अनुभव का बेहतरीन इस्तेमाल किया। भारतीय जोड़ी को वापसी का मौका नहीं मिला और चीनी खिलाड़ियों ने तीसरा गेम 21-8 से जीतकर फाइनल में जगह बना ली। मुकाबला एक घंटे 11 मिनट तक चला।
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सेमीफाइनल में हार के बावजूद ट्रीसा और गायत्री की उपलब्धि भारतीय बैडमिंटन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए दुनिया की शीर्ष जोड़ियों के सामने अपनी क्षमता साबित की।
महिला युगल में भारत ने इससे पहले 2011 में बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में पदक जीता था। लंदन में आयोजित उस प्रतियोगिता में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने कांस्य पदक हासिल किया था। इसके 15 साल बाद ट्रीसा और गायत्री ने भारत को महिला युगल में फिर विश्व चैंपियनशिप पदक दिलाया है।
भारतीय जोड़ी का यह कांस्य पदक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके बढ़ते कद को दर्शाता है और देश में महिला युगल बैडमिंटन के लिए नई उम्मीद जगाता है।
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