महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को उस समय बड़ा झटका लगा, जब लोकसभा अध्यक्ष ने उनकी पार्टी के छह बागी सांसदों को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की आधिकारिक मान्यता दे दी।
इस फैसले के बाद लोकसभा में इन छह सांसदों की पहचान अब शिंदे गुट के सांसदों के रूप में होगी। माना जा रहा है कि इससे संसद में शिंदे गुट की स्थिति और अधिक मजबूत होगी, जबकि उद्धव ठाकरे गुट की संसदीय ताकत को झटका लगेगा।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित सांसदों ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष शिंदे गुट के साथ जाने का दावा पेश किया था। आवश्यक दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने उनके दावे को स्वीकार करते हुए उन्हें शिंदे गुट की शिवसेना का सदस्य मान लिया।
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यह फैसला ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई लगातार जारी है। पार्टी के विभाजन के बाद से दोनों पक्ष संगठन, जनाधार और संसदीय प्रतिनिधित्व को लेकर आमने-सामने हैं। ऐसे में छह सांसदों को मिली यह मान्यता शिंदे गुट के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता मानी जा रही है।
हालांकि, इस फैसले पर शिवसेना (यूबीटी) की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह निर्णय महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ संसद के भीतर भी शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। साथ ही यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि उद्धव ठाकरे गुट इस निर्णय के खिलाफ कोई कानूनी या राजनीतिक कदम उठाता है या नहीं।
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