केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 13 सितंबर को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 2029 से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश में एक समान नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित करना है।
अमित शाह ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों ने आतंकवाद के प्रति भारत की सख्त नीति को स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
मोदी सरकार ने लंबे समय से लंबित मुद्दों पर काम किया: शाह
अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ‘इंडिया फर्स्ट’ के सिद्धांत पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भारत ‘फ्रैजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी से निकलकर दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि हालिया पहली तिमाही के आंकड़ों के अनुसार भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है।
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शाह ने कहा कि सरकार ने अनुच्छेद 370, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की स्थिति जैसे तीन लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों पर भी काम किया है, जिनसे करीब पांच दशकों तक देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामने रखा है।
17 सितंबर से ‘सेवा संकल्प अभियान’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बीजेपी और उसके सहयोगी दल 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाएंगे। शाह ने कहा कि अभियान के जरिए प्रधानमंत्री की 25 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य के संकल्पों को जनता तक पहुंचाया जाएगा। इसका उद्देश्य सेवा को जीवन का हिस्सा बनाना और संगठन को जनभागीदारी व जनकल्याण का माध्यम बनाना है।
क्या है समान नागरिक संहिता?
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत मामलों से जुड़े अलग-अलग धार्मिक कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। भारत में अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानून लंबे समय से मौजूद हैं। यूसीसी के समर्थकों का कहना है कि इससे कानूनों में समानता और सरलता आएगी तथा महिलाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा मजबूत होगी।
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