अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल व्यापार पर बड़ा कदम उठाते हुए चीन की एक प्रमुख रिफाइनरी और 40 अन्य शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे ईरानी तेल के परिवहन और व्यापार में शामिल थीं। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिस चीनी रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाया गया है, वह हेंगली पेट्रोकेमिकल है, जो चीन के डालियान बंदरगाह शहर में स्थित है। इसकी क्षमता प्रतिदिन लगभग 4 लाख बैरल कच्चे तेल को संसोधित करने की है, जिससे यह चीन की सबसे बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों में से एक मानी जाती है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कंपनी 2023 से ईरानी तेल का प्रसंस्करण कर रही थी, जिससे उसे करोड़ों डॉलर का लाभ हुआ। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह चीन में ईरानी तेल खरीदने वाली कई कंपनियों में से एक है।
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चीन इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दे पाया है। चीन पहले से ही ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदार देशों में शामिल रहा है। अनुमान के अनुसार, संघर्ष शुरू होने से पहले चीन ईरान के 80 से 90 प्रतिशत तेल का आयात ‘शैडो फ्लीट’ यानी गुप्त जहाजों के माध्यम से करता था।
इस बीच, अमेरिका ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जो देश ईरानी तेल खरीदेंगे या उसके वित्तीय लेन-देन में शामिल होंगे, उन पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। अमेरिकी वित्त विभाग ने चीन, यूएई, ओमान और हांगकांग को भी इस संबंध में चेतावनी पत्र भेजा था।
ईरान ने इन प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए इन्हें हटाने की मांग की है, जबकि चीन ने कहा है कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं।
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