इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में संस्कृति मंत्रालय की झांकी में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का भव्य उत्सव मनाया जाएगा। इस झांकी की खास बात यह होगी कि इसमें वंदे मातरम् के केवल दो नहीं, बल्कि सभी छह मूल अंतरों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। झांकी में एक चलता हुआ ट्रैक्टर होगा, जिस पर वंदे मातरम् की पूरी मूल पांडुलिपि अंकित रहेगी।
अब तक वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरों को ही भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया है। लेकिन इस वर्ष संस्कृति मंत्रालय की झांकी के माध्यम से गीत के सभी छह मूल अंतरों को सामने लाकर इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करने की योजना है।
यह पहल संसद में पिछले महीने हुए वंदे मातरम् पर तीखे राजनीतिक विमर्श के बाद सामने आई है। उस बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उसने गीत के “महत्वपूर्ण अंतरों” को हटाकर वंदे मातरम् के साथ “विश्वासघात” और “तोड़फोड़” की। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि इस फैसले ने देश के विभाजन के बीज बोने में भूमिका निभाई।
और पढ़ें: वंदे मातरम् की शताब्दी पर आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने संविधान का गला घोंटा: सीएम योगी आदित्यनाथ
दरअसल, वर्ष 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें यह स्वीकार किया गया था कि वंदे मातरम् के कुछ अंशों को लेकर मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को आपत्ति थी। इसी के चलते यह निर्णय लिया गया कि केवल पहले दो अंतरों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया जाएगा।
संस्कृति मंत्रालय की इस वर्ष की झांकी को देश की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रवादी भावना से जोड़कर देखा जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य वंदे मातरम् के संपूर्ण इतिहास को सामने लाना और नई पीढ़ी को इसके मूल स्वरूप से परिचित कराना है।
और पढ़ें: सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण ने भारत की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत किया: दौरे से पहले पीएम मोदी