हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में महिलाओं के एक संगठन ने महिला आरक्षण अधिनियम को जल्द लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को लोक भवन तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने केंद्र सरकार से अपील की कि कानून के क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की शर्त को हटाया जाए।
महिला संगठन ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से बनाए गए महिला आरक्षण अधिनियम को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि अधिनियम के लागू होने में देरी से महिलाओं को मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों में बाधा आ रही है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए अलग से कोई अतिरिक्त शर्त नहीं रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना महिलाओं को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए।
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महिला प्रतिनिधियों ने कहा कि देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलने से नीतियों में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को अधिक प्रभावी तरीके से उठाया जा सकेगा।
संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि महिला सशक्तिकरण के अपने वादों को पूरा करते हुए कानून को जल्द लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी केवल सामाजिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए भी जरूरी है।
गौरतलब है कि महिला आरक्षण अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इसके लागू होने की प्रक्रिया को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है।
शिमला में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से महिलाओं ने केंद्र सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया और कानून को शीघ्र लागू करने की मांग दोहराई।
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