चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका, ईरान और इज़राइल से जुड़े पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।
बीजिंग में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथ बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने यह टिप्पणी की। यह पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद किसी क्षेत्रीय नेता की चीन की पहली यात्रा भी थी।
इस दौरान शी जिनपिंग ने मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि सभी देशों को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत का पालन करना चाहिए और एक साझा, व्यापक और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा विकसित करना जरूरी है।
और पढ़ें: चीन का ट्रम्प को कड़ा जवाब: सैन्य उपाय किसी मुद्दे का समाधान नहीं कर सकते
उन्होंने राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के देशों की सीमाओं और सुरक्षा का पूरा सम्मान होना चाहिए। साथ ही सभी देशों के नागरिकों, संस्थानों और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय कानून के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि वैश्विक व्यवस्था को “जंगल के कानून” में बदलने से रोकने के लिए नियमों का पालन जरूरी है। उन्होंने विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने और क्षेत्रीय देशों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की अपील की।
यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा हुआ है। चीन ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखने और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
चीन ने स्पष्ट किया कि वह इस संकट में रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयास जारी रखेगा।
और पढ़ें: अमेरिका–ईरान तनाव बढ़ा, समुद्री नाकाबंदी के बीच दूसरे दौर की वार्ता की संभावना