भारत के शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े निवेश अवसरों की कमी को फिलहाल विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारणों में गिना जा रहा है। हालांकि, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का मानना है कि एक साल के भीतर यही स्थिति भारत की ताकत बन सकती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर एआई निवेश में यदि नरमी आती है, तो निवेशक ऐसे बाजारों की तलाश करेंगे, जहां आर्थिक विकास एआई पर निर्भर नहीं है और भारत इसके लिए एक प्रमुख विकल्प बन सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक- अमुंडी इंडिया इन्वेस्टर सेमिनार में बोलते हुए नागेश्वरन ने कहा कि एआई बूम में यदि कमजोरी आती है तो भारत इसका फायदा उठाने की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि एक साल बाद एआई ट्रेड की अनुपस्थिति को भारत की ताकत के रूप में देखा जा सकता है।
नागेश्वरन ने माना कि वैश्विक निवेशकों के लिए भारत में एआई आधारित अवसरों की कमी फिलहाल एक कमजोरी मानी जाती है। हालांकि, उनके अनुसार भारत को इस क्षेत्र में “सेकंड मूवर एडवांटेज” मिल सकता है। उन्होंने एआई को “उधार पर आधारित कहानी” बताते हुए कहा कि इसमें किसी तरह का झटका आने पर पूंजी उन विकास अवसरों की ओर जाएगी, जो एआई पर निर्भर नहीं हैं।
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मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भरोसा जताया कि मजबूत आर्थिक वृद्धि के कारण भारत ऐसे निवेशकों के लिए स्वाभाविक विकल्प बन सकता है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल समय की बात है और उन्हें इसके होने का पूरा विश्वास है।
रुपये पर भी उन्होंने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है और हाल में कई कारोबारी सत्रों में इसमें गिरावट देखी गई है। रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर की ओर बढ़ने के बीच दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
नागेश्वरन ने कहा कि भारत की आर्थिक तस्वीर “आधा खाली गिलास” नहीं, बल्कि आधे से ज्यादा भरे गिलास जैसी है। उन्होंने बताया कि चार प्रमुख कारकों ने भारत में पूंजी प्रवाह और रुपये की कमजोरी को प्रभावित किया है, लेकिन देश के पास कई मजबूत आर्थिक आधार मौजूद हैं।
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