प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के एक दिन बाद सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, सरकार ने वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को देखते हुए ईंधन बचाने की अपील की है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित बैठक में बताया कि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। लेकिन भारत की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और किसी भी रिटेल आउटलेट पर आपूर्ति की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। घरेलू एलपीजी की आपूर्ति भी नियमित रूप से जारी है। पिछले तीन दिनों में 1 करोड़ 26 लाख गैस सिलेंडर की डिलीवरी की गई है, जबकि बुकिंग 1 करोड़ 14 लाख रही। इसी अवधि में 17,000 टन से अधिक कमर्शियल एलपीजी और 762 टन ऑटो एलपीजी की बिक्री हुई है।
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सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और यह सुनिश्चित कर रही है कि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सुजाता शर्मा ने प्रधानमंत्री की अपील दोहराते हुए कहा कि लोगों को पेट्रोल-डीजल की खपत कम करनी चाहिए और ऊर्जा संरक्षण के प्रयास करने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जहां संभव हो वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, कारपूलिंग अपनाएं, माल परिवहन के लिए रेलवे को प्राथमिकता दें और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाएं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी हैदराबाद में दिए अपने भाषण में कहा था कि मध्य पूर्व की स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में ईंधन पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने, गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की भी अपील की थी।
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