प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन का समझदारी से उपयोग करने और घरेलू ऊर्जा खपत कम करने की अपील की। उन्होंने यह बात मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव के बीच कही।
हालांकि पेट्रोल और डीजल की बचत की अपील समझ में आई, लेकिन खाने के तेल (कुकिंग ऑयल) का उल्लेख लोगों के लिए थोड़ा आश्चर्यजनक रहा। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का आयात करता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वर्ष 2025–26 में लगभग 19.5 अरब डॉलर मूल्य के वनस्पति तेलों का आयात किया। यह एक बड़ा विदेशी मुद्रा खर्च है, जो सीधे देश के आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है।
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प्रधानमंत्री का संदेश केवल ईंधन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह व्यापक आर्थिक बचत और आयात निर्भरता कम करने पर केंद्रित था। यदि खपत में कमी लाई जाए और वैकल्पिक विकल्प अपनाए जाएं, तो रुपये की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिल सकती है।
पीएम मोदी का संदेश
हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन लगातार दबाव में है और मध्य पूर्व का संकट कई देशों के लिए आर्थिक चुनौतियां बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास सीमित तेल भंडार हैं, इसलिए ईंधन का सावधानी से उपयोग जरूरी है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि:
- कारपूलिंग और मेट्रो का उपयोग बढ़ाएं
- इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं
- माल परिवहन के लिए रेलवे का उपयोग करें
- वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स को फिर से अपनाएं
पीएम मोदी ने कहा कि देश के हित में छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ी ताकत बन सकते हैं और यही सच्चा देशभक्ति का भाव है।
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