भारत में जापानी कंपनियों की रुचि तेजी से बढ़ रही है और अब यह सिर्फ पारंपरिक बैक-ऑफिस कार्यों तक सीमित नहीं रह गई है। रियल एस्टेट सेवा कंपनी कुशमैन एंड वेकफील्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, 100 से अधिक जापानी कंपनियों ने भारत में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) स्थापित किए हैं या उनका विस्तार किया है। इन केंद्रों का कामकाज अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंजीनियरिंग, उत्पाद विकास और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों की ओर तेजी से स्थानांतरित हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव जापानी कंपनियों की पारंपरिक लागत-कटौती और आउटसोर्सिंग रणनीति से आगे बढ़कर उच्च-मूल्य वाली तकनीक और नवाचार गतिविधियों की ओर बढ़ने का संकेत है। कंपनियां अपने वैश्विक कारोबार को सहयोग देने के लिए विशेष कौशल और क्षमताओं की तलाश में भारत का रुख कर रही हैं। जापानी जीसीसी अब डिजिटल उत्पाद विकास, एआई और ऑटोमेशन, एडवांस्ड एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और इंजीनियरिंग समाधानों के लिए उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में काम कर रहे हैं। साथ ही, ये केंद्र वैश्विक कारोबारी परिचालन और निर्णय-प्रक्रिया से भी अधिक गहराई से जुड़ते जा रहे हैं।
कुशमैन एंड वेकफील्ड में एपीएसी टेनेंट रिप्रेजेंटेशन एंड जीसीसी एडवाइजरी की प्रबंध निदेशक अर्पिता श्रीवास्तव ने कहा, "यह अब आउटसोर्सिंग की कहानी नहीं रह गई है। जापानी कंपनियां केवल लागत घटाने के लिए भारत नहीं आ रही हैं। वे ऐसे रणनीतिक क्षमता केंद्र बना रही हैं जो व्यावसायिक मूल्य सृजित करते हैं, नवाचार को गति देते हैं और वैश्विक परिवर्तन पहलों का समर्थन करते हैं।"
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रिपोर्ट में जापानी उद्यमों के बीच डिजिटल और इंजीनियरिंग प्रतिभा की बढ़ती मांग, भारत के विशाल विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) प्रतिभा पूल, तथा देश के कारोबारी और बुनियादी ढांचे की व्यवस्था को इस विस्तार के प्रमुख कारणों के रूप में रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल अनुमानित 25 लाख से 28 लाख एसटीईएम स्नातक तैयार होते हैं। इसके अलावा कार्यालय बुनियादी ढांचे, तकनीकी क्लस्टरों और स्थापित निवेश पारिस्थितिकी तंत्र की उपलब्धता को भी इन केंद्रों के विकास में सहायक बताया गया है।
बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जापानी जीसीसी के लिए प्रमुख गंतव्य बने हुए हैं, जबकि कंपनियां विशेष कौशल तक पहुंच और भविष्य के विस्तार के लिए नए उभरते प्रतिभा बाजारों की भी तलाश कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस विकास से वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में भी नए अवसर बन रहे हैं, क्योंकि जापानी पूंजी कार्यालय परिसरों, टेक्नोलॉजी पार्कों और रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म में योगदान दे रही है, जो भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देते हैं।
अर्पिता श्रीवास्तव ने कहा कि कंपनियां अब इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं कि वे भारत में अपनी रणनीतिक क्षमताओं को कितनी तेजी से बढ़ा सकती हैं, न कि इस पर कि ऐसे केंद्र स्थापित करें या नहीं। उन्होंने कहा, "अगले दशक में हम उम्मीद करते हैं कि जापानी कंपनियां भारत के जीसीसी पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएंगी, जबकि भारत जापानी उद्यमों के लिए नवाचार का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनता जाएगा।" कुशमैन एंड वेकफील्ड के अनुसार, विकास का अगला चरण एआई, इंजीनियरिंग, नवाचार और भारतीय परिचालन तथा जापानी व्यवसायों के बीच सहयोग से संचालित होने की उम्मीद है।
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