लोकसभा में बजट 2026–27 पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। संसद की कार्यवाही कई दिनों के विरोध और राजनीतिक विवाद के बाद फिर से शुरू हुई, जिसके बीच राहुल गांधी का भाषण काफी चर्चा में रहा।
राहुल गांधी का यह संबोधन उस विवाद के बाद आया, जब उन्हें सदन में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देने से रोक दिया गया था। इस मुद्दे पर विपक्ष ने लगातार विरोध प्रदर्शन किया था और सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों और आर्थिक दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए जिउ-जित्सु (मार्शल आर्ट) का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिउ-जित्सु में विरोधी की ताकत को उसी के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। राहुल गांधी ने “ग्रिप”, “चोक” और “सरेंडर” जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति ऐसी बन रही है, जिसमें सरकार जनता और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है और विपक्ष को बोलने से रोकना चाहती है। राहुल गांधी ने कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है और यहां हर आवाज को सुना जाना चाहिए।
बजट पर चर्चा जारी रखते हुए उन्होंने सरकार से रोजगार, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि देश की जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, जबकि सरकार इन मुद्दों पर स्पष्ट रणनीति पेश करने में विफल रही है।
संसद में राहुल गांधी के इस भाषण के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है और बजट सत्र के आगे भी हंगामेदार रहने की संभावना है।
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