क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाए जाने के चलते भारत के झींगा (श्रिम्प) निर्यात में इस वर्ष 15-18% की गिरावट आ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक कीमतों में गिरावट और बढ़ते शुल्क के कारण न केवल निर्यातकों बल्कि किसानों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
अमेरिका भारत के झींगा निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है, और हालिया शुल्क वृद्धि से प्रोसेसिंग कंपनियों की लाभप्रदता पर सीधा असर पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे किसानों का झींगा पालन में निवेश करने का उत्साह भी कम हो सकता है।
क्रिसिल का अनुमान है कि झींगा उत्पादन पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है। बीमारियों के जोखिम, कम उत्पादन, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में घटते दामों के कारण किसानों के लिए झींगा पालन अब कम लाभकारी होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में किसान कम निवेश और सीमित जोखिम वाली वैकल्पिक जलीय खेती की ओर रुख कर सकते हैं।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि मौजूदा हालात जारी रहे तो आने वाले महीनों में झींगा निर्यात में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार को निर्यात बढ़ाने के लिए शुल्क वार्ताओं पर जोर देना चाहिए और किसानों को वित्तीय सहायता व रोग प्रबंधन संबंधी मदद देनी होगी। अन्यथा, यह क्षेत्र दीर्घकालिक मंदी का शिकार हो सकता है।
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