देश के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके-1A कार्यक्रम से जुड़े एक गंभीर मामले में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने हैदराबाद स्थित कंपनी टीईसी एयरो डिवाइसेज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। एचएएल का आरोप है कि कंपनी ने तेजस परियोजना के लिए पुर्जों की आपूर्ति से संबंधित 199 फर्जी परीक्षण रिपोर्ट जमा की थी।
यह प्राथमिकी एचएएल के विमान प्रभाग की उप महाप्रबंधक की शिकायत पर 2 जून को बेंगलुरु के एचएएल पुलिस थाने में दर्ज की गई। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम. शिवराम प्रसाद को मामले में आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया है।
शिकायत के अनुसार, एचएएल ने 28 मार्च 2022 से तेजस एलसीए-83 एमके-1ए परियोजना से जुड़े पुर्जों की आपूर्ति के लिए 18 खरीद आदेश जारी किए थे। नमूने, परीक्षण रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज जमा करने के बाद टीईसी एयरो डिवाइसेज को 35 श्रेणियों के पुर्जों के निर्माण की मंजूरी मिली थी। बड़े पैमाने पर आपूर्ति के दौरान कंपनी को मूल परीक्षण रिपोर्ट जमा करनी थीं।
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हालांकि, जब एचएएल के गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने तन्य शक्ति, कठोरता, ब्रेक लोड, शीयर, एनडीटी, माइक्रोस्ट्रक्चर और सॉल्ट स्प्रे परीक्षणों की मूल रिपोर्ट मांगी, तो कंपनी उन्हें प्रस्तुत नहीं कर सकी।
बाद में नवंबर 2023 में कंपनी ने एक माफीनामा भेजकर स्वीकार किया कि उसने एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस, हैदराबाद के नाम पर दो गलत रिपोर्ट जमा की थीं। इसके बाद एचएएल ने ऑडिट कराया, जिसमें फरवरी से सितंबर 2023 के बीच जमा की गई सभी 199 रिपोर्ट फर्जी पाई गईं। जांच में यह भी सामने आया कि एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस ने ये रिपोर्ट जारी ही नहीं की थीं।
इसके बाद एचएएल ने टीईसी एयरो डिवाइसेज को 10 मार्च 2027 तक तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया। एचएएल ने स्पष्ट किया कि कंपनी को इस अवधि तक कोई वित्तीय भुगतान नहीं किया गया था।
गौरतलब है कि तेजस एमके-1A भारत का स्वदेशी रूप से विकसित सुपरसोनिक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसे एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने विकसित किया है और एचएएल भारतीय वायुसेना के लिए इसका निर्माण करती है।
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