ईरान ने अमेरिका के साथ पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली संभावित युद्धविराम वार्ता से हटने की चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि जब तक लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं होता, तब तक वह किसी भी शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा।
ईरान के अधिकारियों ने मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है। ईरान के अनुसार, यह खबर पूरी तरह गलत है।
एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि जब तक लेबनान में संघर्ष नहीं रुकता और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक वार्ता स्थगित रहेगी।
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लेबनान में हाल ही में इज़राइल द्वारा हमलों में तेजी लाई गई है, जिसमें लगभग 182 लोगों की मौत हो गई। इन हमलों में ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाया गया, जिसने पहले ही संघर्ष में ईरान का समर्थन किया था।
इस बीच, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि यह कदम इज़राइल के हमलों के जवाब में उठाया गया है और शांति प्रस्ताव में लेबनान में संघर्ष समाप्त करने की शर्त शामिल है।
हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि लेबनान में युद्ध समाप्त करना समझौते का हिस्सा है, लेकिन इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे समझौते का हिस्सा मानने से इनकार किया है।
इज़राइल ने यह भी दावा किया है कि उसने हिज़्बुल्लाह नेता के एक करीबी सहयोगी को मार गिराया है, जबकि हिज़्बुल्लाह ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है, जिससे शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
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