भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा।
विकास कार्यों और योजनाओं की समीक्षा करते हुए कंगना रनौत ने कहा कि सरकारी पैसा सही लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए और इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सार्वजनिक धन का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा गलत हाथों में चला जाता है। उन्होंने योजनाओं की निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही मजबूत करने की जरूरत बताई।
कंगना ने लंबित विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों से नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कई काम पिछले डेढ़ से दो साल से लंबित हैं और अब केवल मुद्दों को संबोधित करने का समय बीत चुका है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि काम पूरा कर उसकी रिपोर्ट उन्हें दी जाए।
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उन्होंने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके द्वारा 11 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, लेकिन इसके बावजूद एक भी काम शुरू नहीं हुआ। इस पर उन्होंने अधिकारियों की कार्यक्षमता पर तीखी टिप्पणी की।
कंगना ने कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र और राज्य के अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर जवाब देना पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों पर बेहद लापरवाह और अक्षम होने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या उन्हें राष्ट्रीय मीडिया के सामने यह कहना चाहिए कि लोग केवल वेतन लेने के लिए कार्यालयों में आते हैं।
भाजपा सांसद ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इनका वास्तविक लाभ गांवों और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने विकास कार्यों की गुणवत्ता, योजनाओं की प्रगति और सरकारी धन के इस्तेमाल पर कड़ी निगरानी रखने तथा परियोजनाएं तय समयसीमा में पूरी करने को कहा।
कंगना पहले भी दिशा बैठकों में अधिकारियों के कामकाज पर नाराजगी जता चुकी हैं। अक्टूबर 2025 की बैठक में भी उन्होंने अधिकारियों को समीक्षा प्रक्रिया को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी थी।
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