राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने मंगलुरु कुकर ब्लास्ट मामले में आरोपी मोहम्मद शारिक को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला तब दिया जब आरोपी ने सुनवाई के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
यह मामला देश की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गंभीर आतंकी साजिश के रूप में देखा गया था। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी मोहम्मद शारिक इस विस्फोट की योजना और उसे अंजाम देने की कोशिश में शामिल था। एनआईए ने मामले की गहन जांच के बाद अदालत में मजबूत सबूत पेश किए थे, जिसके आधार पर यह सजा सुनाई गई।
घटना उस समय सामने आई थी जब मंगलुरु में एक कुकर बम विस्फोट की कोशिश की गई थी। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और समय पर कार्रवाई के कारण बड़ा हादसा टल गया था। इसके बावजूद इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
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एनआईए ने जांच के दौरान पाया कि यह मामला केवल एक सामान्य आपराधिक घटना नहीं बल्कि एक सुनियोजित आतंकी गतिविधि का हिस्सा था। आरोपी ने विस्फोटक सामग्री का उपयोग कर दहशत फैलाने की कोशिश की थी।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी माना कि आरोपी का अपराध गंभीर प्रकृति का है और समाज की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाला है। इसी आधार पर उसे कठोर कारावास की सजा दी गई।
इस फैसले को सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। एनआईए अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और सजा के कार्यान्वयन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह फैसला देश में आतंकवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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