पूर्व मंत्री और विधायक राजा भैया को चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड से जुड़े मामले में सीबीआई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने मृतक अधिकारी की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दाखिल दोबारा जांच की मांग को खारिज कर दिया है।
मामले में परवीन आजाद ने दोबारा जांच की मांग की थी। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले की नए सिरे से जांच की और अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। रिपोर्ट में राजा भैया को आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया गया।
सीबीआई के अनुसार, राजा भैया के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। रिपोर्ट और मामले से जुड़े तथ्यों पर सुनवाई के बाद लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया। अदालत ने माना कि राजा भैया के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त ठोस आधार मौजूद नहीं है।
और पढ़ें: 15 साल पुराने फर्जी दस्तावेज मामले में बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण बरी
जियाउल हक की हत्या का यह मामला उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से जुड़ा है। घटना के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। बाद में मृतक सीओ की पत्नी ने जांच के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए दोबारा जांच की मांग की थी।
अदालत का यह आदेश विशेष रूप से राजा भैया की कथित भूमिका और दोबारा जांच के बाद सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट से संबंधित है। मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया इससे अलग है।
फैसले के बाद राजा भैया को जियाउल हक हत्याकांड से जुड़े इस मामले में कानूनी स्तर पर राहत मिली है।
और पढ़ें: रायचूर में महिला की पत्थर से पीटकर हत्या, मां के शव पर रोती मिली 18 महीने की बच्ची