पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 से अधिक सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत दिए हैं। इस कदम के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि सांसदों का एक समूह अलग राजनीतिक गुट या नई पार्टी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
बताया जा रहा है कि लोकसभा में अलग संसदीय समूह बनाने के लिए आवश्यक संख्या इन सांसदों के पास मौजूद है। हालांकि अंतिम निर्णय उचित समय पर लिए जाने की बात कही जा रही है। इस घटनाक्रम ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
संकट की शुरुआत तब हुई जब वरिष्ठ टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नई दिल्ली में कई बैठकों का दौर शुरू हुआ, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी। सूत्रों के मुताबिक, पहले लगभग 13 टीएमसी सांसदों ने सुखेंदु शेखर रॉय से मुलाकात की। इसके बाद इन्हीं सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की। बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी की भी चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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इन सांसदों में प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, जगदीश चंद्र बसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, पार्थ भौमिक, बापी हलदार, शताब्दी रॉय, असित कुमार माल, जून मालिया, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
अपने इस्तीफे में सुखेंदु शेखर रॉय ने टीएमसी पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के उत्पीड़न और प्रशासनिक विफलता के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार की कुछ नीतियों की सराहना भी की, जिससे राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
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